Silent wish!!खामोश चाहत!!

Perhaps the big culprit was clear that he wanted to make boots 
In today’s mazaras and tombs which are being unaware today, 
Roshan Alam also has similar darkness in existence 
Tadapkar’s tales of loyalty are shedding ash, 
We have seen sadness in the rugged settlements.
In the desert, how are you screaming? 
Pick up the baggage of the bag which is for the journey 
The doors waiting at the door are moaning, 
Pigeons in the courtyard of tombs and marauders
The warriors are calling the corpses dead, 
This is also a special place in life. 
Here are the flavors of Amavasya Aman, fluttering with fries, 
This bustle and the sound of the piercing sound 
In the city of blind, the bedrock baron is running the mill, 
I was always searching for 
We are now tempting the wanderings of desperate wants. 
“Pkvishvamitra”
खामोश चाहत
शायद बडी पाक साफ थी वह चाहत की बुलन्दियां

उजडे मजारों और मकबरों में जो आज कसमसा रही हैं,

रोशन आलम में भी ऐसे ही अंधेरों का वजूद है मौजूद

तडप तडपकर वफादारियों की दास्तां अश्क बहा रही हैं,

उजडी हुई बस्तियों में देखी है हमने गमगीन खामोशी

वीरानों में फिर कैसे दाना चुगती चिडियायें चहचहा रही हैं,

उठाकर सामान की पोटली निकला है सफर के लिए जो

दरवाजे पर लगी हुई टकटकिया इंतजारियां कराह रही हैं,

मकबरों और मजारों के आंगन में गुडगुडाते हैं कबूतर

वीरानियां लहक लहककर लाशों को लोरियां सुना रही हैं,

ये भी जिंदगी के ही कुछ खास मुकाम हैं सामने हमारे

यहां पर फसादों से बेवास्ता अमन की फस्ले लहलहा रही हैं,

यह भीडभाड और यह कानों में चुभने वाला शोर शराबा

अंधों की नगरिया में अपाहिज बांदियां चक्की चला रही हैं,

खोजता फिरता था मैं हमेशा ही पुरसुकूं हसीन वादियां

कसम से हमें तो अब वीरान चाहतों की मजारें लुभा रही हैं।

“Pkvishvamitra”

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