||असलियत||

बदलते मौसम जैसी इन मौहब्तों को

कितने लोग असल में जानते पहचानते हैं,

सुराहियों में कैद कुईयांओ का पानी

कितने लोग पीने से पहले खूब छानते हैं,

यकीन का सलीबी सच ही है अंधापन

आशिक कब लकीरे तकदीरी बांचते हैं,

वक्त के साथ ठंडा होता है इश्के तूफान

कितने लोग दौरे उफान गरमी नापते हैं,

शर्तों की बिसात है ही दिमागी तिजारत

बर्फीले पहाड क्या धूल भी पहचानते हैं,

तासीर के मुताबिक खेलना है मुनासिब

दरिया क्या कभी अपने किनारे लांघते हैं,

आईनों की औकात पर मत उठाओ सवाल

बेजुबान पत्थर भी हश्रे जुबांतराशी जानते हैं।

“PKVishvamitra”

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बदलाव

बुढाती उम्र के झरोखे के उस पार,

कौन है एक खालीपन के अलावा,

सुबह भी है वैसी ही धुंधली धुंलली,

जैसे रात की कालिमा थी उल्टा तवा,

छडी कंपकपाती है बदन के बोझ में

महसूस होती है ठहरी ठहरी सी हवा,

छिपेगा दिन तो क्या सुबह भी आयेगी,

ओसी सुबह बदलेगी जरूर आबोहवा।

“P.K.Vishvamitra”

Across the window of old age,

In addition to an emptiness,

Morning blurred fog,

Like the night Kalima was in the upside down,

The rod is shivering in the burden of body

Feel the cold air,

Will you hide the day, whether it will come in the morning,

OC will change in the morning, definitely the climate.

समय!! Time!!

कभी समय काटना भी होता है कितना मुश्किल,

कभी खुद के लिए समय चुराना है कितना मुश्किल,

मुश्किलों की बिसात पर लुढकते,फिसलते ये पुतले,

मनचाहे समय के लिए उलझते जूझते इंसानी पुतले,

समय की भी समझ से बाहर हो चले ये बिसाती मोहरे,

समय की सही पैमाईश साबित करते हुए पैमाने दोहरे,

समय!!समय!!ही है या बिसाती मोहरों की कब्रगाह है,

है कब्रनशीनों को गुमान कि वो हर सच्चाई से आगाह है।

“Pkvishvamitra”

Sometimes cutting times also happens, how difficult,

Ever difficult to steal the time for yourself,

Rolling on the tricks of the difficulties, slipping these statues,

Wondering about the time when human beings struggling to cope,

It’s time to get out of the sense of these biscuits,

Prove the correct meteor of time, scale two,

Time is a time !! or a graveyard of crores of rupees,

The graves are guessed that they are warned by every truth.

Pkvishvamitra

Hatefulness!!घृणाशीलता!!

नोट-: इस लेख का उद्देश्य किसी की मानहानि/अपमान करना बिल्कुल भी नहीं है,केवल लोगों की वैचारिक स्थिति का निरूपण करना है।

राज्यसभा चुनाव में भीमराव अम्बेडकर की पराजय ने लोगों को दो-तीन दशक पीछे वहीं पहुंचा दिया है जहां मायावती/बसपा/कांशीराम सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के लिए “तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार” जैसे नारे लगाते/लगवाते थे,सत्ता के गलियारे से बाहर हो चुकी बसपा का थिंक टैंक एकबार फिर अपने सोशलमीडियाई समर्थकों को वही नारा थमाकर राजनैतिक उपलब्धियां पाना चाहता है?,राजनैतिक उपलब्धियों के लिए प्रयासरत रहना प्रत्येक राजनैतिकदल का अधिकार है लेकिन संविधान और डॉ.अम्बेडकर तथा बौद्ध धर्म की बात करने वाले लोगों को यह शाब्दिक हिंसा उचित प्रतीत होती है तो यह उनके गैरजिम्मेदाराना रवैये का ही परिचायक है क्योंकि इससे तो यही सिद्ध हो जायेगा कि इनके पास भी जनता को जनता के नजरिये से देखने वाली ऐनक नहीं है और सामाजिक क्रांति के नाम पर यह लोग भी वैमनस्यकारी सामाजिक स्थिति उत्पन्न कर देना चाहते हैं?,ऐसी स्थितियों का निर्माण करते समय बसपाई थिंक टैंक भूल जाता है कि “तिलक/तराजू/तलवार” का समर्थन प्राप्त किये बिना बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में असफल ही रही थी,हालांकि इसका निदान वह लोग अखिलेशियन गठजोड का सहारा बता सकते हैं और “तिलक/तराजू/तलवार” की जगह थोक में मुस्लिम वोट मिलने की संभाव्यता प्रस्तुत कर सकते हैं लेकिन मुस्लिम वर्ग को असंख्य अवसर बसपा से गद्दारी करने का प्रमाणपत्र थमा चुकी मायावती का यह रवैया आंशिक ही सही किन्तु प्रभावित जरूर करेगा,दूसरी बात यह 👎 बच्ची/बच्चा जिस विचार से ओतप्रोत हुआ है वह विचार इसे भाजपाई अतिवादी समर्थकों के समान ही अतिवाद की घृणाशीलता के सडांधी तालाब में डूबो देगा/डूबो रहा है,जो बच्चा जातीय घृणा से लडने की बात सोचकर आगे सोशलमीडिया पर आया था आज वह स्वयं कुल तीन लोगों के राजनैतिक निर्णय को सामने रखकर देश के तीन वर्गों को जूते मारने की अपील बडा लेखक/चिन्तक और बसपाई नेता बनने की भूख में कर रहा है?,मैं आश्चर्यचकित हूं कि मेरे उन मित्रों ने भी जिन्हें मैंने इस टवीट को आगे बढाने के बाद अनफॉलो कर दिया है उन्होंने इस नासमझ बच्चे के टवीट को आगे बढाकर इस 👎विचार/अपील का समर्थन किया है।

Thinking!!सोच!!

By taking such a head upwards,

This sky will not come down,

Why are you looking at clouds,

Will there be any rain after thinking?

Do not think the canvas on canvas,

Will any flower blossom in the hall?

When the weather of barren land changes,

Will the lotus blossom on the sandy mound?

Leave the city immersed in the glare illumination,

Any person will be found in slums,

Why was the search for a man in the world running,

Where will you find Adam between the gods and goddesses,

It is like the seasonal flowers of flowers, these worlds,

This time it will change itself from morning to evening,

The sun turns down the chanting of the night,

After the dark night, the sun will come out itself,

Do not rock your eyes, wait for a good time,

Good times will come by itself after a bad time. “PKVishvamitra”

ऐसे मुंह उपर की तरफ उठाने से,

यह आसमान नीचे नहीं आ जायेगा,

बादलों को क्यों देख रहे हो एकटक,

सोचने से ही क्या कोई बरस जायेगा,

ख्याली कैनवास पर मत उकेरो खाका,

आसमां में क्या कोई फूल खिल जायेगा,

बंजर जमीनों की तासीर कब बदलती है,

रेतीले टीले पर क्या कमल खिल जायेगा,

चकाचौंध रोशनी में डूबे हुए शहर छोड दो,

मलिन बस्तियों में कोई इंसान मिल जायेगा,

दौडती हुई सी दुनियां में इंसान की खोज क्यों,

जिस्मीपुतलों के बीच आदम कहां मिल जायेगा,

फूलों की मौसमी क्यारियों जैसी ही है ये दुनियां,

यह वक्त सुबह से शाम में खुद ही बदल जायेगा,

ढलता सूरज करता है रात के आने की मुनादी,

अंधेरी रात के बाद सूरज खुद ही निकल आयेगा,

आखें पथराकर मत करो अच्छे वक्त का इंतजार,

बुरे वक्त के बाद अच्छा वक्त खुद ही आ जायेगा।-“PKVishvamitra”

Act!!कायदा!!

Only two step land

The beggar who wants to get the land himself,

The stars, such as dance troupes,

Understanding the King who is himself a courtier,

We were blind to the lamp as an insignia of light,

But there is no other God in this life than sorry,

There are amulets of the worldly training, how neutral,

There is something else about the book that has been published on the book,

We are always gafil after seeing buildings

There is no other person in the law than wrapped in a book .- “PKVishvamitra”

उस आसमान से मांगता रहा बस दो कदम जमीन

जो खुद जमीन को पाने की चाहत वाला भिखारी है,

चांद की महफिल में नाचती तवायफों जैसे सितारे,

शहंशाह समझा जिसे वह खुद किसी का दरबारी है,

हम चिरागों को रोशनी का खुदा समझकर बाअदब थे,

मगर अफसोस इस चिरागे खुदा का खुदा कोई और है,

दुनियावीं तालीम के ताबीज भी हैं अब कितने बेअसर,

किताब पर चढा किताब का मुलम्मा इल्म तो कुछ और है,

हम हसरतों की इमारतें देखकर गाफिल होते हैं हमेशा

जिल्द में लिपटा बेसब सा कायदा इबारत तो कोई और है।-“PKVishvamitra”

आंखें!!/Eyes!!

अजीब ही है ये अश्कों का बेताब समुन्दर

हरेक जिस्मानी जमीन में हिलौर मारा करता है,

इसके किनारों की अहद है कितनी बेमायनी सी

जज्बातिया गरमी में ज्वार उफान मारा करता है,

हूक उठती है लहर लहर ऊंची सी छंलाग बनकर

खुद की गहराईयों में इसने कैसे इतना पानी उतारा है,

खारे पानी के दो गहरे गडढे होते हैं कितने फर्दाफाश

डूबकर शख्स कहता है हमने तो खुद को खुद मारा है,

दो जुगनू बनकर चमचमाती है जिन्दगी की मशाली लौ

कहता है परवाना फरिश्ताये फनागिरी ने हमें पुकारा है,

जिंदा होने की मुनादी तो है यही पुरकशिश रोशन मजार

हैरान हूं खुदाया तुमने इतना सजीला इन्हें कैसे संवारा है।।-“PKVishvamitra”

It’s strange that the desperate sea monster

Every body makes holes in the ground,

The edges of its edges are so unmatched

In the heat of summer the tide booms,

Hooke raises wave wave becoming high ceiling

How much water has it brought in its depths,

There are two deep landfill of salt water

After drowning the person says we have killed ourselves,

Two Jugnu is shiny and bright

It is said that Parvatiya Firastayya Phanagiri has called us,

It is the only pranabi to be alive

I am amazed you, how are you so beautiful, how are they saved?.-“Pkvishvamitra”

ShabadPrahar