Hatefulness!!घृणाशीलता!!

नोट-: इस लेख का उद्देश्य किसी की मानहानि/अपमान करना बिल्कुल भी नहीं है,केवल लोगों की वैचारिक स्थिति का निरूपण करना है।

राज्यसभा चुनाव में भीमराव अम्बेडकर की पराजय ने लोगों को दो-तीन दशक पीछे वहीं पहुंचा दिया है जहां मायावती/बसपा/कांशीराम सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के लिए “तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार” जैसे नारे लगाते/लगवाते थे,सत्ता के गलियारे से बाहर हो चुकी बसपा का थिंक टैंक एकबार फिर अपने सोशलमीडियाई समर्थकों को वही नारा थमाकर राजनैतिक उपलब्धियां पाना चाहता है?,राजनैतिक उपलब्धियों के लिए प्रयासरत रहना प्रत्येक राजनैतिकदल का अधिकार है लेकिन संविधान और डॉ.अम्बेडकर तथा बौद्ध धर्म की बात करने वाले लोगों को यह शाब्दिक हिंसा उचित प्रतीत होती है तो यह उनके गैरजिम्मेदाराना रवैये का ही परिचायक है क्योंकि इससे तो यही सिद्ध हो जायेगा कि इनके पास भी जनता को जनता के नजरिये से देखने वाली ऐनक नहीं है और सामाजिक क्रांति के नाम पर यह लोग भी वैमनस्यकारी सामाजिक स्थिति उत्पन्न कर देना चाहते हैं?,ऐसी स्थितियों का निर्माण करते समय बसपाई थिंक टैंक भूल जाता है कि “तिलक/तराजू/तलवार” का समर्थन प्राप्त किये बिना बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में असफल ही रही थी,हालांकि इसका निदान वह लोग अखिलेशियन गठजोड का सहारा बता सकते हैं और “तिलक/तराजू/तलवार” की जगह थोक में मुस्लिम वोट मिलने की संभाव्यता प्रस्तुत कर सकते हैं लेकिन मुस्लिम वर्ग को असंख्य अवसर बसपा से गद्दारी करने का प्रमाणपत्र थमा चुकी मायावती का यह रवैया आंशिक ही सही किन्तु प्रभावित जरूर करेगा,दूसरी बात यह 👎 बच्ची/बच्चा जिस विचार से ओतप्रोत हुआ है वह विचार इसे भाजपाई अतिवादी समर्थकों के समान ही अतिवाद की घृणाशीलता के सडांधी तालाब में डूबो देगा/डूबो रहा है,जो बच्चा जातीय घृणा से लडने की बात सोचकर आगे सोशलमीडिया पर आया था आज वह स्वयं कुल तीन लोगों के राजनैतिक निर्णय को सामने रखकर देश के तीन वर्गों को जूते मारने की अपील बडा लेखक/चिन्तक और बसपाई नेता बनने की भूख में कर रहा है?,मैं आश्चर्यचकित हूं कि मेरे उन मित्रों ने भी जिन्हें मैंने इस टवीट को आगे बढाने के बाद अनफॉलो कर दिया है उन्होंने इस नासमझ बच्चे के टवीट को आगे बढाकर इस 👎विचार/अपील का समर्थन किया है।

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7 विचार “Hatefulness!!घृणाशीलता!!&rdquo पर;

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