Masks!!मुखौटे!!

Masks

The layers of layers on the sides are clustered on the faces 
All the pickups are fizzled out, 
People keep masks on masks like this 
Realities become dwarf in front of them, 
We have put lots of colorful layers on the faces 
Still do not know why the conspiracies are successful, 
They have tilted the knot of the textures and shoulders our shoulders 
How many false reports are so weighty, 
The powers of vigilance are achieved only by all sinners 
The paper flowers are displayed in the bouquets, 
In front of the cloak 
Fake smell also makes the eyes dry, 
He has started reading mischief even now. 
Whose bad habits become a mask of goodwill, 
False lies in the same way, silent reality 
The seekers become victims of the realization of the real, 
We are thrown out and thrown by the truth 
Just the realities of truth become badgamania, 
Truth is not a sign of truth 
Chadhi masking is done on masks, 
When the Tired Being Desperated 
In the same way, only the lives of the people are done, 
What is the truth and what can be true Yarrow 
Just get entangled in puzzles and become entangled puzzles. 
“Pkvishvamitra”

चेहरों पर चढी हुई हैं परत पर परत की ही परतें

उतारने की सभी कोशिशे फिजूल हो जाया करती हैं,

लोग चढाये रखते हैं मुखौटों पर मुखौटे कुछ इस तरह

हकीकतें तमाम उनके सामने तो बौनी हो जाया करती हैं,

हमने उतारी हैं कितने ही चेहरों पर चढी हुई रंगीन परतें

फिर भी न जाने क्यों साजिशें कामयाब हो जाया करती हैं,

वो बनावट के पुलिन्दे ढोते ढोते झुक चुके हैं कंधे हमारे

तमाम झूठी इबारतें कैसे इतनी वजनदार हो जाया करती हैं,

असरदारी की हिकमतें हासिल हैं सब बदकारियों को ही

कागजी फूलौ पत्ती गुलदस्तों में नुमाईशी हो जाया करती हैं,

असली रंग हो जाता है कितना बदरंग नकली के सामने

नकली खुश्बू से भी तो फिजायें महकदार हो जाया करती हैं,

वो कुपढ भी पढाने लगे हैं अब इल्मौ किताबत की बातें 

जिनकी बदकारियां मशहूरियत का नकाब हो जाया करती हैं,

नकली में ही उलझी होती है कहीं खामोश सी असलियत

तलाश असली की दुश्वारियत की शिकार हो जाया करती हैं,

उधेड उधेडकर फेंकते रहते हैं हम सच को तमाम जिंदगी

बस सच की अहसासियतें बदगुमांनिया हो जाया करती हैं,

सच्चाई की पडताल नहीं होती है किसी वहम का सबब

मुखौटों पर चढी मुखौटागिरी ही अंजाम हो जाया करती हैं,

थका हुआ सा मायूस दिल कब रोकता है पडताली मुहिम

कोशिशे बदस्तूर में ही जिंदगानियां तमाम हो जाया करती हैं,

सच क्या है सच क्या था और सच क्या हो सकता है यारो

बस उधेडबुन पहेलियों में उलझी पहेलियां हो जाया करती हैं।

“Pkvishvamitra”

14 विचार “Masks!!मुखौटे!!&rdquo पर;

    1. जी, आपने सही समझा है,धन्यवाद!!उत्साह वर्धन करते रहिये,सुनिश्चित लेखन को धार प्राप्त हो जायेगी,उत्साह वर्धन का सदैव अभिलाषी रहूंगा।

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