Poor!!//दरिन्दा!!

Blindfolded 

In the darkness of stupidity eating stumbling, 
Wanting to get god on the ground 
The goddess was making Goddess herself, 
Wanting to land on the ground 
The gothic was telling angels only the angel, 
He had to lay his hand across the river 
Oops !! he was telling the owner of two jahan, 
The wires were getting wires where 
The blind eyes of the eyes were telling the innocence, 
Fakiri was in the glance of the wealth of wealth 
The false listener of the idol was telling him magic, 
Glittering shop 
Bawasa was telling Dera by Ibadat’s elm, 
Kubadi’s fine is found on 
Abhailas’ screams were telling unhabad sounds, 
Was immersed in the sea of ​​crime itself. 
He was telling him the ship carrying the sea.||दरिन्दा||
आंखों पर बांधकर यकीन की पटटी

बेवकूफी के अंधेरे में ठोकरें खा रहे थे,

खुदा को जमीन पर पाने की चाहत में

जिस्मानी पुतले को ही खुदा बना रहे थे,

जमीन पर जन्नत उतारने की चाहत में

वहशी दरिन्दे को ही फरिश्ता बता रहे थे,

उसका हाथ थामकर करना था पार दरिया

ऊफ!!उसे दो जहान का मालिक बता रहे थे,

तार तार हो रहे थे जहां आबरूयों के दुपटटे

आंख के अंधे नैनसुखिये रूहानियत बता रहे थे,

फकीरी में थी दौलत के तिलस्म की चकाचौंध

इबादत के झूठे तलबगार उसे जादू बता रहे थे,

चमक दमक से सजी हुई फरेबी धंधे की दुकान

इबादत के इल्म से बावास्ता उसे डेरा बता रहे थे,

कबाडी की छान पर मिलता है भला फूंस कभी

अबलाओं की चीखों को अनहद नाद बता रहे थे,

डूब था जो खुद ही गुनाह के समुन्दर में गले तक

उसे ही समुन्दर पार कराने वाला जहाज बता रहे थे।

“Pkvishvamitra”

7 विचार “Poor!!//दरिन्दा!!&rdquo पर;

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